हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अंजुमन-ए-शरई शियान-ए-जम्मू कश्मीर के तत्वावधान में 13 मुहर्रम के अवसर पर कश्मीर घाटी के विभिन्न इलाकों में अलम शरीफ़ और ज़ुलजनाह के जुलूस पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ निकाले गए। इन जुलूसों में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर हज़रत इमाम हुसैन (अ) और शहीदाने-कर्बला को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

अंजुमन-ए-शरई की ओर से जिन स्थानों पर अज़ादारी के जुलूस निकाले गए, उनमें मौला शोला बीरवाह, काकनमरन, आकरवेल बडगाम, बागपोरा ओड़ीना, गुंड नौगाम, पीर मोहल्ला ज़ालपोरा, सोनाबरन अंदरकोट सोनावारी (बांदीपोरा), कानलू पट्टन और ज़ाड़ी मोहल्ला देवरा बारामूला सहित अनेक क्षेत्र शामिल थे। इन स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पूरे अनुशासन, श्रद्धा और धार्मिक उत्साह के साथ अज़ादारी के कार्यक्रम सम्पन्न किए।
इस अवसर पर इमामबाड़ा बागपोरा ओड़ीना सोनावारी में आयोजित एक बड़े जनसमूह को संबोधित करते हुए अंजुमन-ए-शरई शियान के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन आगा सय्यद हसन अल-मूसवी ने इमामत के दर्शन और इमाम हुसैन (अ) की शहादत के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि यज़ीद का चरित्र और उसकी शासन-व्यवस्था न केवल इस्लामी शिक्षाओं और शरीअत-ए-मुहम्मदी (स) के स्पष्ट विरुद्ध थी, बल्कि वह मानवीय मूल्यों, नैतिक सिद्धांतों तथा न्याय और इंसाफ़ की भावना के भी पूरी तरह विपरीत थी। इसी कारण हज़रत इमाम हुसैन (अ) ने ऐसे अत्याचारी और अनैतिक शासक की बैअत (निष्ठा स्वीकार करने) से इंकार किया और सत्य तथा न्याय की रक्षा के लिए अपने प्राणों के साथ-साथ अपने अहलेबैत (अ) की महान कुर्बानी भी पेश की।

आगा सय्यद हसन ने कहा कि पैग़म्बर मुहम्मद (स) के नवासे हज़रत इमाम हुसैन (अ) और उनके वफ़ादार साथियों को कर्बला के तपते हुए मैदान में भूख और प्यास की हालत में जिस निर्दयता से शहीद किया गया, वह अत्याचार और अन्याय के इतिहास का सबसे दर्दनाक और काले अध्यायों में से एक है। लेकिन इमाम हुसैन (अ) ने धैर्य, दृढ़ता, साहस और अटूट संकल्प का ऐसा अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया, जो सदा के लिए पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

उन्होंने आगे कहा कि कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन (अ) द्वारा असत्य और अत्याचार के सामने सत्य की आवाज़ बुलंद करना न्याय की स्थापना, ज़ुल्म के विरुद्ध संघर्ष और मानव सम्मान की रक्षा का अमर संदेश है। अहलेबैत (अ) का अद्वितीय त्याग और बलिदान इस्लामी इतिहास का एक उज्ज्वल अध्याय है, जो हर युग में सत्य के खोजियों, अहलेबैत (अ) से प्रेम करने वालों तथा स्वतंत्रता और न्याय के समर्थकों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत बना रहेगा।

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